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Thursday, September 15, 2011

गुरुवर श्री .कडारु मल्ल्या जी को एवं श्री डॉ.पी. श्रीनिवास राव जी को हार्दिक शुभकामनाएँ!!!!!


हिंदी दिवस के अवसर पर आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी द्वारा हिंदी भाषा के विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले  व्यक्तियों का सम्मान किया गया है.. जिसमें  वर्ष २०११ के लिए कडारु.मल्ल्या जी को पद्मभूषण  डॉ. मोटूरी सत्यनारायण पुरस्कार के अंतर्गत एक लाख रुपयें नकद पुरस्कार आन्ध्र प्रदेश राज्य के उपमुख्या मंत्री         श्री .दामोदर राजनरसिम्हा  एवं हिंदी अकादमी के अध्यक्ष श्री . लक्ष्मी प्रसाद जी ने प्रदान किया है ...



उसी प्रकार से तेलुगु भाषी हिन्दी युवा लेखक पुरस्कार के लिए पच्चीस हज़ार रुपये नकद पुरस्कार एवं ज्ञापिका  
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक श्री.पी .श्रीनिवास राव जी को प्राप्त हुआ है ..
इस अवसर पर 
गुरुवर श्री .कडारु मल्ल्या जी को एवं  श्री डॉ.पी. श्रीनिवास राव जी को हार्दिक शुभकामनाएँ!!!!!
डॉ.पी. श्रीनिवास राव जी को बधाई.......

विडियो भाग 




.....चित्रावली .....




स्वतंत्र वार्ता १५ सितम्बर ...





Wednesday, September 14, 2011

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद केंद्र में हिंदी दिवस समारोह संपन्न !!!!!!!

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद केंद्र में हिंदी दिवस समारोह संपन्न !!!!!!!

                            दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, बी.एड .प्रशिक्षण महाविद्यालय एवं हिंदी प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालयों ने संयुक्त रूप में हिंदी दिवस समारोह मनाया है .इस  समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वतंत्र वार्ता के संपादक डॉ.राधेश्याम शुक्ल जी आये है .श्री शुक्ल जी को सभा के तीनों विभागों के प्राध्यापकगण विशेष आह्वान किया है .

                               समारोह की अध्यक्षता उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो.ऋषभदेव शर्मा जी ने किया है.इस सभा में संपर्क अधिकारी श्री हलेमनी जी,सचिव पी.ए.राधाकृष्णन जी, और बी.एड प्रशिक्षण महाविद्यालय की प्राचार्या.डॉ. सीता नायुडू जी , तथा हिंदी प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.लक्ष्मी उमाराणी जी शामिल है..

                           सभा के आरंभ में दीप प्रज्वलित किया गया है . सचिव डॉ.पी.ए.राधाकृष्णन जी अपने सन्देश देते हुए हिंदी दिवस की महत्व को बताया है.


डॉ.बलविंदर कौर जी  ने भारत के गृह-मंत्री पी.चिदंबरम जी के सन्देश को सभा में वचन किया है वह यहाँ प्रस्तुत है ...

विशिष्ट अतिथि के रूप में आये हुए डॉ. राधेश्याम शुक्ल जी का विशेष व्यख्यान !!!

part-1




part-2


part-3




                   प्रो. ऋषभदेव शर्मा जी ने एक लघु कथा कहते हुए सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनएं बताये है , अंत में संपर्क अधिकारी  श्री हलेमनी जी ने धन्यवाद प्रकट किया है ,, सम्पूर्ण सभा को आनंद -उत्साहों के साथ रखते हुए एक विशेष रूप से संचालन कार्य डॉ. जी .नीरजा जी ने किया  है ...


सभी को पुनः हिंदी दिवस की बधाई.....
सम्पूर्ण रिपोर्ट के लिए यहाँ  क्लिक कीजिये ....
ऋषभ उवाच: हिंदी-दिवस जनभाषा की गौरव-प्रतिष्ठा का दिन है - डॉ. राधेश्याम शुक्ल



Tuesday, September 13, 2011

हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ !!!!





संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर, 1949 को सर्वसम्मति से हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया था, तब से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है.  इसलिए इसका सम्मान करना चाहिए और बहुतायत में प्रयोग करना चाहिए.


इस अवसर पर सभी हिन्दी प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएँ!!!

Tuesday, September 6, 2011

शिक्षक दिवस सुसंपन्न !!!!!



शिक्षक दिवस सुसंपन्न !!!!!


कुल सचिव प्रो.दिलीपसिंह एवं प्रो.ऋषभदेव शर्मा जी के अमूल्य वचन !!!!!
                               


हैदराबाद, ६ सितम्बर,२०११.


साहित्य और अन्य विषयों की शिक्षा में एक मूलभूत अंतर यह है कि साहित्य में व्यक्‍तित्व विकास और जीवन मूल्यों की शिक्षा अंतर्निहित रहती है जबकि अन्य विषयों के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता. इसलिए हामारे जीवन में साहित्य के शिक्षक का महत्व अपेक्षाकृत अधिक होता है. वह साहित्य में निहित उच्च मानवीय गुणों के प्रति हमारे मन को उन्मुख और संस्कारित करता है. यह संभव है कि कोई विशेष जीवन मूल्य स्वयं शिक्षक में विद्‍यमान न हो तो भी साहित्य के माध्यम से छात्र के मन उसे जगाया जा सकता है. यहाँ हम हिंदी साहित्य की चर्चा कर सकते हैं कि किस प्रकार पद्‍मावत में शिक्षक का प्रतीक हीरामन तोता जीवन और अध्यात्म से जुड़ी पते की बातें करता है. इसी प्रकार कबीर, तुलसी और रहीम के दोहों के माध्यम से बड़ी सहजता से नैतिक शिक्षा दी जा सकती है. साहित्य में प्रकट और परोक्ष रूप से शिक्षा के सूत्र समाए हुए हैं. अगर कोई साहित्यकार प्रकृति का वर्णन करता है तो वह नदी, समुद्र, वृक्ष और बादल तक को शिक्षक बना देता है कि कैसे इनके माध्यम से परमार्थ और परोपकार जैसी उदार चीज़ें सीखी जा सकती है. यही कारण है कि बचपन से ही कोई भी साहित्यिक पाठ पढ़ाने के बाद हम से यह पूछा जाता है कि इस पाठ से आपको क्या सीख मिली. गणित या अर्थशास्त्र अथवा अन्य किसी विषय के पाठ में ऐसा नहीं होता. इसलिए साहित्य का छात्र भाग्यशाली है कि वह शिक्षक और पाठ दोनों के माध्यम से जीवन को श्रेष्‍ठ बनाने की शिक्षा प्राप्‍त कर सकता है.

ये विचार दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के कुलसचिव प्रो.दिलीप सिंह ने यहाँ सभा के खैरताबाद परिसर में आयोजित उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के शिक्षक दिवस समारोह में अध्यक्ष पद से बोलते हुए व्यक्‍त किए. प्रो.सिंह ने आगे कहा कि साहित्य की ही भाँति भाषा भी हमारा शिक्षक है. उन्होंने कहा कि भाषा में सामाजिक और सांस्कृतिक अनेक ऐसे पहलू निहित होते हैं जिन्हें सीखकर हम लोक व्यवहार के साथ साथ व्यक्‍तित्व निर्माण के लक्ष्‍य को भी प्राप्‍त कर सकते हैं. उन्होंने ध्यान दिलाया है सभी भाषाओं के साहित्य में अनेक ऐसे पात्र मौजूद हैं जो हमें जीवन संघर्ष की शिक्षा देते हैं तथा हताशा के क्षणों में हमारे काम आते हैं. यदि प्राचीन साहित्य को छोड़ भी दें तो आज के कहानी और उपन्यासों में भी शिक्षा का यह गुण मिल जाएगा. प्रो.दिलीप सिंह ने याद दिलाया कि प्रेमचंद के उपन्यास ‘रंगभूमि’ का सूरदास अंधा अनपढ़ भिखारी होते हुए भी बहुत बड़ा अनाऔपचारिक शिक्षक है जो हमें समाज के लिए कुछ सार्थक कार्य करने की प्रेरणा देता है. डॉ.दिलीप सिंह ने बताया कि भाषा और साहित्य हमारे सबसे अधिक निकट सबसे बड़े शिक्षक है क्योंकि इनसे हम जीवन को सुंदर बनाने के रास्ते सीख सकते हैं अतः साहित्य को परीक्षा लिखने अथवा शोधग्रंथ रचने के लिए ही नहीं, जीवन और समाज को सार्थक बनाने की शिक्षा प्राप्‍त करने की दृष्‍टि से भी पढ़ना चाहिए.


इस अवसर पर संस्थान के छात्रों और शोधार्थियों ने वि्भागाध्यक्ष प्रो.ऋषभदेव शर्मा सहित सभी अध्यापकों डॉ.साहिरा बानू बी. बोरगल, डॉ.जी.नीरजा, डॉ.बलविंदर कौर, डॉ.गोरखनाथ तिवारी और डॉ.मृत्युंजय सिंह का उत्तरीय, स्मृति चिह्‍न, पुष्‍प गुच्छ और उपहार देकर सम्मान एवं अभिनंदन किया.                                                                                                                                                 



REPORT COLLECTED FROM



Sunday, September 4, 2011

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं ,......

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं ,......





आदर्श समाज के लिए मूल बीज अध्यापक ही है . विभिन्न क्षेत्रों में विकास हेतु नवीन विज्ञान की सृष्टि करनेवाला सिर्फ अध्यापक ही है . वैज्ञानिक हो या अन्य क्षेत्रों में जो कुशल निपुण, सब को तैयार करनेवाले मात्र अध्यापक ही है. अत्यंत पवित्र काम है अध्यापकीय काम .इसलिए हम अध्यापक को भगवान के समान मानते हैं .


गुरु ब्रह्मा गुरुर्विष्णु : गुरुर्देवो महेश्वर: 
गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरावेनम:!!!!!! 




सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं !!!!!