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Monday, August 12, 2013

हिंदी-तेलुगु तुलनात्मक व्याकरण एवं आदर्श अध्यापक के गुण पर व्याख्यान संपन्न

हिंदी-तेलुगु तुलनात्मक व्याकरण एवं आदर्श अध्यापक के गुण पर व्याख्यान संपन्न
हैदराबाद 16 अप्रैल 2013      
     
हिंदी प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालय,दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आन्ध्र हैदराबाद के तत्वावधान में 16 अप्रैल 2013 को हिंदी-तेलुगु तुलनात्मक व्याकरण एवं आदर्श अध्यापक के गुण पर हिंदी प्रेमी मंडली विजयनगर कॉलोनी के अध्यक्ष चवाकुल नरसिंह मूर्ती का अतिथि व्याख्यान संपन्न हुआ।    

नरसिंह मूर्ती ने प्रशिक्षणार्थीयों को संबोधित करते हुए अपने व्याख्यान में हिंदी-तेलुगु तुलनात्मक व्याकरण से संबंधित अध्यापन बिन्दुओं पर प्रकाश डाला और कहा कि अध्यापक के लिए व्यकारण अत्यंत आवश्यक है.इसके अभाव में शिक्षण कार्य सफल नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि आज के बदलते परिप्रेक्ष्य में अध्यापन कार्य में बदलाव लाना अनिवार्य है। संप्रेषणीयता और बोधगम्यता अध्ययन तथा अध्यापन दोनों के आवश्यक तत्व है।  


आरंभ में अतिथि वक्ता का परिचय प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालय की प्रवक्ता राधाकृष्ण मिरियाला ने दिया।उसके बाद अध्यक्षीय उद्भोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रमोद बालकृष्ण परीट ने आदर्श अध्यापक के गुण एवं व्याकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य वक्ता ने प्रशिक्षणार्थियों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया। कार्यक्रम में डॉ.लक्ष्मी उमाराणी मलेंपाटि,जुजु गोपीनाथ एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण महाविद्यालय की प्रवक्ता जुजु गोपीनाथ के धन्यवाद के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।       


  

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