Tuesday, April 3, 2012

डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा की पहली किताब "तेलुगु साहित्य : एक अनुशीलन" लोकार्पित.




हिंदी-तेलुगु द्विभाषी पत्रिका ‘स्रवन्ति’ की सह-संपादक डा.गुर्रमकोंडा नीरजा की समीक्षा-पुस्तक ‘तेलुगु साहित्य : एक अवलोकन’ का लोकार्पण समारोह यहाँ साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘साहित्य मंथन’ के तत्वावधान में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के सभागार में संपन्न हुआ.

लोकार्पण  करते हुए मुख्य अतिथि प्रो.दिलीप सिंह ने कहा कि तेलुगु विश्व भर में हिंदी के बाद सबसे ज्यादा पढ़ी जानेवाली भारतीय भाषा है इसलिए तेलुगु में निहित साहित्यिक धरोहर से अन्य भाषाभाषियों को परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है तथा डा.नीरजा की यह पुस्तक इस आवश्यकता की पूर्ति की दिशा में एक सार्थक प्रयास है. प्रो.सिंह ने लोकार्पित पुस्तक की पठनीयता की प्रशंसा करते हुए बताया कि इसमें खास तौर पर तेलुगु साहित्य की सामाजिकता और लौकिकता को उभारा गया है.

विमोचित किताब की पहली प्रति को स्वीकार करते हुए वार्ता पत्रकारिता संस्थान के प्राचार्य गुर्रमकोंडा श्रीकांत ने कहा कि तेलुगु भाषा और साहित्य की समझ के बिना भारतीय साहित्य की आत्मा को नहीं पहचाना जा सकता इसलिए यह पुस्तक भारतीय साहित्य के हर अध्येता के लिए अत्यंत उपयोगी है. उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस पुस्तक में तेलुगु साहित्य के पुराने और नए रचनाकारों का जो समीक्षात्मक विवेचन किया गया है वह अत्यंत प्रामाणिक है.







इस अवसर पर प्रमुख तेलुगु साहित्यकार प्रो.एन.गोपि भी उपस्थित थे. उन्होंने लेखिका को शुभकामना देते हुए कहा कि यह रचना एक खास इतिहासबोध से संपन्न है तथा लेखिका ने लगातार बदलते हुए आधुनिक साहित्य की आधारभूत चिंताओं को समझकर नए नए विमर्शों का भी सटीक विवेचन और विश्लेषण किया है. प्रो.गोपि ने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से लेखिका ने बहुमूल्य रत्नों के समान तेलुगु साहित्यकारों का परिचय विशाल हिंदी जगत से कराकर सेतु का कार्य किया है.     
‘तेलुगु साहित्य : एक अवलोकन’ की समीक्षा करते हुए भगवानदास जोपट ने कहा कि इस पुस्तक में संकलित इक्कीस निबंध साहित्य को देखने और विश्लेषित करने की लेखिका की शक्ति के परिचायक हैं. उन्होंने कहा कि इन निबंधों में तेलुगु साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाकारों के सरोकारों, शैलियों और प्रवृत्तियों पर जो सारगर्भित चर्चा की गई है वह ताजगी की महक लिए हुए है. अन्नमाचार्य से लेकर उत्तरआधुनिक तेलुगु साहित्य तक को समेटनेवाली इस पुस्तक को जोपट ने भारतीय मनीषा के सम्पूर्ण वैभव और संवेदनशीलता को इतिहास के परिप्रेक्ष्य में देखने की एक ईमानदार कोशिश बताया.   


अध्यक्षासन से संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डा.राधेश्याम शुक्ल ने कहा कि डा.गुर्रमकोंडा नीरजा की यह पुस्तक तेलुगु साहित्य ही नहीं बल्कि तेलुगु समाज और संस्कृति को भी निकट से समझने में हिंदी पाठक की सहायता करेगी. उन्होंने भाषा, साहित्य और संस्कृति के आपसी संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक एकता को पुष्ट करने के लिए इस प्रकार की रचनाओं की अधिकाधिक जरूरत है.


लोकार्पण के अवसर पर लेखिका डा.जी.नीरजा का सारस्वत सम्मान भी किया गया. इस अवसर पर डा.ऋषभ देव शर्मा, एस.के.हलेमनी, एम.सीतालक्ष्मी, डा.मोहन सिंह, डा.पूर्णिमा शर्मा, डा.पुष्पा शर्मा, डा.रोहिताश्व, डा.टी.वी.कट्टीमनी, डा.देवेन्द्र शर्मा, विनीता शर्मा, राजकुमार गुप्ता, एलिजाबेथ कुरियन मोना, डा.भीम सिंह, डा.आंजनेयुलू, लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, पवित्रा अग्रवाल, कोसनम नागेश्वर राव, डा.सीता नायडू, डा.मृत्युंजय सिंह, डा.शक्ति द्विवेदी, अर्पणा दीप्ति, जी.संगीता आदि सहित शताधिक हिंदी प्रेमी और साहित्यकार उपस्थित रहे.       

Wednesday, January 25, 2012



सभी ब्लॉगर मित्रों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ !!!






One Nation, One Vision, One Identity 
“No Nation is Perfect, it needs to be made perfect.” 
Meri Pehchaan Mera India 
Happy Republic Day.



Sunday, January 15, 2012

सभी ब्लॉगर मित्रों को संक्रांति की शुभकामनाएँ!!!




तन में मस्ती 
मन में उमंग 
देकर सबको अपनापन 
गुड में जैसे मीठापन .
होकर साथ हम उड़ायें पतंग 
और भरलें आकाश में अपना रंग.
हैप्पी मकर संक्रांति!!!!!  

Saturday, December 31, 2011

सभी ब्लॉगर मित्रों को नव -वर्ष की शुभकामनाएँ!!!

नव वर्ष २०१२ मंगलमय  हो !!!!!






New year cards

Sunday, October 23, 2011

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा हैदराबाद केंद्र से विकसित एक मात्र मासिक पत्रिका स्रवंति .

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा हैदराबाद केंद्र से विकसित एक मात्र मासिक पत्रिका 
स्रवंति .





`स्रवंति' दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (आंध्र) द्वारा प्रकाशित 56 वर्ष पुरानी पत्रिका है. अपने वर्तमान स्वरूप में `स्रवंति' द्विभाषा मासिक पत्रिका है जिसमें हिंदी और तेलुगु की सामग्री सम्मिलित होती है. इन दिनों इसका संपादन उच्च शिक्षा और शोध संस्थान,दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद के अध्यक्षप्रो.ऋषभदेव शर्मा के निर्देशन में डॉ.जी.नीरजा (सह संपादक ) कर रही हैं. जनवरी २०११ के अंक से इस पत्रिका को इंटरनेट पर भी उपलब्ध कराया जा रहा है. इस पत्रिका अनेक शोधार्थियों के लिए कई प्रकार से उपयोग हो रहा है . ...

प्रो.ऋषभदेव शर्मा  जी को और  डॉ.जी.नीरजा   जी को  विशेष रूप से धन्यवाद ....

  👉“మనిషి జీవితం !?!?”👈 పుట్టగానే జాతకం బ్రతుకంతా నాటకం బంధాలన్నీ బూటకం దానికై నువ్వు చేసే పాతకం చివరికి నువ్వు చస్తే సూతకం ఇదే కదా !......