Monday, September 9, 2013

सभी ब्लॉगर मित्रों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं।

सभी ब्लॉगर मित्रों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं।  


गणेश की ज्योति से नूर मिलता है 
सबके दिलों को सुरूर मिलता है ,
जोभी जाता है गणेशा के द्वार,
कुछ न कुछ जरूर मिलता है 
जय श्री गणेशा। 

"मेरे गुरु देव प्रो ऋषभदेव शर्मा की छठी काव्यकृति ‘सूँ साँ माणस गंध’ लोकार्पित"

"मेरे गुरु देव प्रो ऋषभदेव शर्मा की छठी काव्यकृति ‘सूँ साँ माणस गंध’ लोकार्पित"


"सूँ  साँ   माणस गंध" लोकार्पण समारोह।
चित्र में बये से एम. रांगय्या,प्रोफ.ऋषभ देव शर्मा, प्रोफ.एम्.वेंकटेश्वर, प्रोफ.दिलीप सिंह, डॉ.राधेश्याम शुक्ल,डॉ.नीरजा गुर्रमकोंडा,लक्ष्मी नारायण अग्रवाल।  


हैदराबाद : 6-09-2013.

‘साहित्य मंथन’ और ‘श्रीसाहिती प्रकाशन’ के संयुक्त तत्वावधान में प्रो.एम.वेंकटेश्वर की अध्यक्षता में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में संपन्न एक भव्य समारोह में वरिष्ठ भाषाचिंतक प्रो.दिलीप सिंह ने कवि प्रो.ऋषभदेव शर्मा की छठी काव्यकृति ‘सूँ साँ माणस गंध’ को लोकार्पित किया. प्रो.दिलीप सिंह ने लोकार्पित पुस्तक की विवेचना करते हुए कहा कि मनुष्यता की शाश्वत गंध, लोकतंत्र और सृजन की बेचैनी इसका केंद्रीय कथ्य है तथा इन कविताओं को  काव्य सौष्ठव की दृष्टि से श्रेष्ठ रचनाओं की पंक्ति में रखा जा सकता है। उन्होंने मृत्यु और रचना प्रक्रिया से संबंधित कविताओं को भी इस संग्रह की विशेष उपलब्धि माना। विशिष्ट अतिथि डॉ.राधेश्याम शुक्ल ने कवि की काव्ययात्रा का मूल्यांकन करते हुए कहा कि समकालीन युगबोध की दृष्टि से उनकी कविताएँ आज के समय की आवश्यकता की पूर्ति करती हैं और रचनाधर्म के निर्वाह की दृष्टि से यह कवि भारतीयता और लोकचेतना से अनुप्राणित प्रतीत होता है। शुभकामनाएँ देते हुए वरिष्ठ कवि गुरुदयाल अग्रवाल ने कहा कि हर पीढ़ी को अपनी आवाज बुलंद करने वाला एक कलमकार चाहिए होता है और ऋषभदेव शर्मा ऐसे ही कलमकार है तथा ‘सूँ साँ माणस गंध’ की कविताएँ आज के आतंक ग्रस्त माहौल में मशाल की तरह जलती हुई कविताएँ हैं। लोकार्पित पुस्तक का परिचय देते हुए लक्ष्मीनारायण अग्रवाल ने ‘सूँ साँ माणस गंध’ की व्याख्या की और इन कविताओं को मिट्टी और शौर्य की कविताएँ बताया।अध्यक्षीय भाषण में प्रो.एम.वेंकटेश्वर ने लोकार्पित संग्रह की विविधता और कलात्मकता की प्रशंसा करते हुए खासतौर से लंबी कविताओं के शिल्प की दृष्टि से ‘सृजन का पल’ और ‘मैं सृजन की टेक धारे हूँ’ कविताओं का विश्लेषण किया तथा कहा कि समकालीन काव्य परिदृश्य में ‘सूँ साँ माणस गंध’ की कविताएँ एक सार्थक हस्तक्षेप करती हैं और अपनी एक अलग जगह की माँग करती हैं।  इस अवसर पर कवि ऋषभदेव शर्मा ने लोकार्पित पुस्तक से कुछ चुनी हुई कविताओं का वाचन किया। साथ ही साहित्य मंथन, विश्वंभरा, श्रीसाहिती प्रकाशन, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, कादम्बिनी क्लब  आदि संस्थाओं तथा कवि के प्रशंसकों और मित्रों ने उनका पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ सारस्वत सम्मान किया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में डॉ.ऋषभदेव शर्मा द्वारा संपादित एवं प्रो.दिलीप सिंह को समर्पित वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित अभिनंदन ग्रंथ ‘भाषा की भीतरी परतें’ की मानार्थ प्रतियाँ ग्रंथ के सहयोगी लेखकों को भेंट की गईं। संपादक मंडल के सदस्यों ने पुस्तक के मुख चित्र की अनुकृति प्रो. दिलीप सिंह को समर्पित की। इस समारोह में बड़ी संख्या में हिंदी अध्यापकों, शोध छात्रों, प्रचारकों और लेखकों ने भाग लिया जिनमें डॉ.गोरखनाथ तिवारी, प्रो.जे.पी.डिमरी, डॉ.के.बी.मुल्ला, वेणुगोपाल भट्टड, नरेंद्र राय, डॉ.विनीता शर्मा, डॉ.देवेंद्र शर्मा, भंवरलाल उपाध्याय, डॉ.पूर्णिमा शर्मा, लिपि भारद्वाज, राजेश प्रसाद, डॉ.एम.रंगैया, जी.परमेश्वर, डॉ.शकीला खानम, डॉ.शकुंतला रेड्डी, डॉ.अनिता गांगुली, डॉ.एम.लक्ष्मीकांतम, पवित्रा अग्रवाल, डॉ.किशोरीलाल व्यास, डॉ.बी.एल.मीणा, प्रतिभा कुमारी, डॉ.रोहिताश्व, डॉ.टी.मोहन सिंह, शशिनारायण स्वाधीन, डॉ.मृत्युंजय सिंह, डॉ.साहिराबानू बी. बोरगल, डॉ.बलविंदर कौर, डॉ.रजनी धारी, डॉ.विनीता सिन्हा, डॉ.बी.बालाजी, वी.ज्योत्स्ना कुमारी, वी.कृष्णा राव, द्वारका प्रसाद मायछ, वेंकटेश्वर राव, राधाकृष्ण मिरियाला, जूजू गोपीनाथ, खदीर, जी.संगीता, मंजु शर्मा, जे. रामकृष्ण, निर्मला सुमिरता, पी.पावनी, पेरिके झांसी लक्ष्मीबाई, गहनीनाथ, अम्बिका,बाबासाहब, एन.अप्पल नायुडु, शुभदा, के.नागेश्वर राव, वी. शंकर, संतोष विजय मुनेश्वर, फातिमुन्निसा, नाजिया बेगम, राजु, वर्षा ठाकुर, रेणु कुमारी, डॉ.ए.जी.श्रीराम, श्रीराम श्रीनिवास, शंकर सिंह ठाकुर, सुरेश, संतोष काम्बले, मोहम्मद कासिम, मोहम्मद अंसारी, अनामिका आदि के नाम सम्मिलित हैं।समारोह का संचालन लक्ष्मीनारायण अग्रवाल ने किया और धन्यवाद डॉ.जी.नीरजा ने प्रकट किया।   





इस कार्यक्रम की अन्य जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिये।










Sunday, September 8, 2013

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आन्ध्र,हैदराबाद में शिक्षक दिवस समारोह सुसंपन्न...

हैदराबाद  ०५ सितंबर २०१३.
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र, हैदराबाद स्थित स्वर्णजयंती भवन में श्री एम् वी पापन्न गुप्ता हाल परिसर में शिक्षक दिवस समारोह संपन्न हुआ. इस कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप में डॉ अहिल्या मिश्र,विशेष अतिथियों के रूप में उच्च शिक्षा और शोध संस्थान,दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आन्ध्र , हैदराबाद के  विभाग अध्यक्ष प्रो.ऋषभ देव शर्मा ,शिक्षा महाविद्यालय-हैदराबाद के प्राचार्य डॉ.के.बी. मुल्ला एवं आंध्र सभा के वरिष्ट व्यवस्थापक श्री के वेंकटेश्वर राव पधारे। इस कार्यक्रम का अध्यक्ष दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र के  सचिव  श्री सी एस होसगौडर रहे।  आंध्र सभा के व्यवस्थापक के. वेंकटेश्वर राव अतिथियों का स्वागत करते हुए स्वागत भाषण किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशेष अतिथि गण शिक्षक के बारे में अनेकानेक विषयों को प्रस्तावित करते हुए आदर्श शिक्षक डॉ. सर्वेपल्ली राधाकृष्णन की प्रशंसा किये। छात्र- छात्राओं को आदर्श शिक्षक बनने की प्रेरणा दिये।  इस सुअवसर पर सभी विभागों के अध्यापकों को सम्मान किया गया। इसी कार्यक्रम में सभा के कंप्यूटर प्रशिक्षण परीक्षा में उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण- पत्र देकर पुरस्कृत किये। इस कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री सी एस होसगौडर अपने अध्यक्षीय भाषण में कहते हुए "अध्यापक राष्ट्र का निर्माता है।" समाज में शिक्षक स्थान के बारें में प्रस्तावित किया है। अगले साल से सभा के सभी शखाओं में शिक्षक दिवस बड़े पैमाने में सभा की ओर से करने के लिए आदेश दिया।इस अवसर पर सभा के विभिन्न विभागों के अध्यापक गण,प्रशिक्षणार्थी गण और सभा के शिक्षणेतर कर्मचारी गण उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ ए जी श्री राम ने किया। डॉ.गोरखनाथ तिवारी ने कार्यक्रम का धन्यवाद समर्पण किया। 

इस कार्यक्रम की चित्रावली : 

Saturday, August 17, 2013

शुभकामना समारोह संपन्न



शुभकामना समारोह संपन्न 

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में स्वतंत्रता पर्व संपन्न



दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में स्वतंत्रता पर्व संपन्न
हर कीमत पर आजादी की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध हों – प्रो.दिलीप सिंह

हैदराबाद, 15 अगस्त 2013. 

स्वतंत्रता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जिस राष्ट्रीय आजादी का हम आज स्वच्छंद उपभोग कर रहे हैं उसे इस देश ने लंबे संघर्ष और भीषण यातनाओं के बाद प्राप्त किया है. संघर्षों का यह इतिहास इस दृष्टि से अनोखा है कि एक ओर हमारे किशोर और युवा क्रांतिकारियों ने उपनिवेशी शासन को सशस्त्र चुनौती दी तथा दूसरी ओर सहनशीलता की चरमसीमा तक अहिंसक आंदोलन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की इस भावना को प्रमाणित कर दिखाया कि अत्याचारी व्यवस्था को भी अहिंसा की ताकत के सामने आखिरकार झुकना ही पडता है. इस संघर्ष की समस्त गाथा तमाम भारतीय भाषाओं के साहित्य में और लोक की स्मृतियों में सुरक्षित है. आवश्यकता है कि हमारी नई पीढ़ियाँ साहित्य में निहित इस राष्ट्रीय चेतना को आत्मसात करें और मिली हुई आजादी की हर कीमित पर रक्षा के लिए संकल्पबद्ध हों.
ये उद्गार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के कुलसचिव प्रो.दिलीप सिंह ने आंध्र सभा में मुख्य अतिथि के रूप में ध्वजारोहण के पश्चात अपने संबोधन में प्रकट किए. इस समारोह में चवाकुल नरसिंह मूर्ति, शेख मोहम्मद कासिम, शेख जमीला बेगम विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए.
67 वें स्वतंत्रता पर्व के तहत आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई. इसके बाद ध्वज स्तंभ के समक्ष पूजा का सांस्कृतिक अनुष्ठान संपन्न हुआ और ध्वजारोहण के पश्चात अतिथियों ने अपने उद्बोधनात्मक विचार व्यक्त किए. छात्र-छात्राओं ने राष्ट्र चेतनापरक गीत प्रस्तुत किए. समारोह में सभा के विभिन्न विभागों के व्यवस्थापक, प्राध्यापक, कार्यकर्ता और छात्र उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए.
आरंभ में आंध्र सभा के सचिव सी.एस.होसगौडर ने मुख्य अतिथि का स्वागत-सत्कार किया. संयोजन प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने किया तथा धन्यवाद डॉ.के.बी.मुल्ला ने दिया. 
     
प्रस्तुति डॉ.जी.नीरजासह संपादक ‘स्रवन्ति’, प्राध्यापक, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद – 500004मोबाइल – 09849986346ईमेल – neerajagkonda@gmail.com

स्वतंत्रता दिवस की चित्रावली 


Wednesday, August 14, 2013

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ-कामनाएं

सभी ब्लॉगर मित्रों को एवं हर भारतवासी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं।

आज़ादी की कभी शाम ना होने देंगे;
शहीदों की कुर्बानी बदनाम ना होने देंगे;
बची हो जब तक एक भी बूंद लहू की रगों में;
तब तक भारत माता का आँचल नीलाम ना होने देंगे;
वन्दे मातरम!





Monday, August 12, 2013

हिंदी प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालय-हैदराबाद में वार्षिकोत्सव संपन्न

हिंदी प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालय-हैदराबाद में वार्षिकोत्सव संपन्न

हैदराबाद 16 जुलाई 2013


    दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा द्वारा संचालित हिंदी प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालय-हैदराबाद के प्रांगण में वार्षिकोत्सव 16 जुलाई 2013 को संपन्न हुआ।इस कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र शाखा के सचिव सी.एस.होसगौड़र, मुख्य अतिथि के रूप में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र की अध्यक्ष एम.सीतालक्ष्मी,विशेष अतिथि के रूप में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र शाखा के अपर सचिव एस.राधाकृष्णन, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय-हैदराबाद केन्द्र के सहायक निदेशक शंकरसिंह ठाकूर और शिक्षा महाविद्यालय-हैदराबाद के प्राचार्य डॉ.के.बी.मुल्ला और हिंदी प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य प्रमोद बालकृष्ण परीट पधारे।

  



    कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती दीप प्रज्वलन से हुआ।छात्राध्यापिकाओं ने स्वागत गीत से अतिथियों का स्वागत किया।











प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्रवक्ता राधाकृष्ण मिरियाला ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया।











इस कार्यक्रम के संयोजक एवं हिंदी प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य प्रमोद बालकृष्ण परीट ने सत्र 2012-2013  का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और छात्रों को आशीर्वाद दिया।









मुख्य अतिथि एम.सीतालक्ष्मी ने छात्रों को वार्षिक परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए कुशल एवं आदर्श शिक्षक बनने की प्रेरणा दी।








विशेष अतिथिगण डॉ.के.बी.मुल्ला और शंकरसिंह ठाकूर ने छात्रों को आशीर्वाद दिया।










कार्यक्रम के अध्यक्ष सी.एस.होसगौड़र ने अपने अध्यक्षीय भाषण में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के विकास के बारे में बताते हुए सभी प्रशिक्षणार्थियों को शुभकामनाओं के साथ प्रोत्साहित किया।इस अवसर पर महाविद्यालय में आयोजित विभिन्न खेल-कूद तथा संस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये गए।इस अवसर पर पी.जी.विभाग,शिक्षा महाविद्यालय के प्रवक्तागण सभा के शिक्षणेतर कर्मचारीगण और प्रशिक्षणार्थीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रशिक्षण महाविद्यालय की प्रशिक्षणार्थी फातिमुन्निसा और शिवलक्ष्मी ने किया।





प्रशिक्षण महाविद्यालय की प्रवक्ता जुजु गोपीनाथ के धन्यवाद समर्पण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।  










वार्षिकोत्सव की चित्रावाली 




  👉“మనిషి జీవితం !?!?”👈 పుట్టగానే జాతకం బ్రతుకంతా నాటకం బంధాలన్నీ బూటకం దానికై నువ్వు చేసే పాతకం చివరికి నువ్వు చస్తే సూతకం ఇదే కదా !......