Thursday, March 24, 2011

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शत शत नमन...

आज के दिन 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव,


राजगुरु हंसते-हंसते लाहौर जेल में फांसी के फंदे पर झूल गए थे। आजाद भारत न उनके सपनों को पंख दे सका

और न उनकी शहादत के मायने समझ सका!



आगरा में नूरी गेट स्थित इस मकान में कभी शहीद भगत सिंह रहे थे! आज यह जर्जर हालत में पड़ा हुआ है!


भगतसिंह की साहस का परिचय इस गीत से मिलता है जो उन्होने अपने छोटे भाई कुलतार को ३ मार्च को लिखा था!


''उसे यह फ़िक्र है हरदम तर्ज़-ए-ज़फ़ा (अन्याय) क्या है

हमें यह शौक है देखें सितम की इंतहा क्या है

दहर (दुनिया) से क्यों ख़फ़ा रहें,

चर्ख (आसमान) से क्यों ग़िला करें

सारा जहां अदु (दुश्मन) सही, आओ मुक़ाबला करें''




                                                               भगत सिंह

जन्म - तिथि: २७ सितंबर, १९०७

जन्म - स्थान: लायलपुर, पंजाब, ब्रिटिश भारत

मृत्यु - तिथि: २३ मार्च, १९३१ (आयु २३)

मृत्यु - स्थान: लाहौर, पंजाब, ब्रिटिश भारत

आंदोलन: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम

प्रमुख संगठन: नौजवान भारत सभा, कीर्ती किसान पार्टी एवं हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन असोसिएशन

धर्म: सिख धर्म (आरंभीक वर्ष), नास्तिक

प्रभाव राजविप्लव, साम्यवाद, समाजवाद


शहीद भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु जिंदाबाद

सारे जहा से अच्छा हिंदोस्ता हमारा इंकलाब जिंदाबाद




इन शब्दों के साथ "मेरी " बलोग की तरफ से शहीदों को शत शत नमन
(पुण्यतिथि के अवसर पर देश के इन वीर सपूतों को शत शत नमन)

Tuesday, March 22, 2011

ऋषभ देव शर्मा को आंध्र प्रदेश हिन्दी अकादमी का पुरस्कार प्राप्त

                                                                                                         Monday, September 27, 2010
अपने मार्गदर्शक --श्री ऋषभ देव शर्मा जी  को आंध्र प्रदेश हिन्दी अकादमी का पुरस्कार प्राप्त




 आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी, हैदराबाद [आंध्र प्रदेश] ने हिंदी दिवस की पूर्वसंध्या पर अकादमी भवन में हिंदी उत्सव का आयोजन किया और अच्छी धूमधाम से २०१० के हिंदी पुरस्कार सम्मानित हिंदीसेवियों तथा साहित्यकारों को समर्पित किए. एक लाख रुपए का पद्मभूषण मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार अष्टावधान विधा को लोकप्रिय बनाने के उपलक्ष्य में डॉ. चेबोलु शेषगिरि राव को प्रदान किया गया. तेलुगुभाषी उत्तम हिंदी अनुवादक और युवा लेखक के रूप में इस वर्ष क्रमशः वाई सी पी वेंकट रेड्डी और डॉ.सत्य लता को सम्मानित किय गया. डॉ. किशोरी लाल व्यास को दक्षिण भारतीय भाषेतर हिंदी लेखक पुरस्कार प्राप्त हुआ तथा विगत दो दशक से दक्षिण भारत में रहकर हिंदी भाषा और साहित्य की सेवा के उपलक्ष्य में डॉ.ऋषभ देव शर्मा को बतौर हिंदीभाषी लेखक पुरस्कृत किया गया. इन चारों श्रेणियों में पुरस्कृत प्रत्येक लेखक को पच्चीस हज़ार रुपए तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया.



पुरस्कृत लेखकों ने ये सभी पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता शीर्षस्थ साहित्यकार पद्मभूषण डॉ. सी.नारायण रेड्डी के करकमलों से अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ.यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद , आंध्र प्रदेश के भारी सिंचाई मंत्री पोन्नाला लक्ष्मय्या तथा माध्यमिक शिक्षा मंत्री माणिक्य वरप्रसाद राव के सान्निध्य में ग्रहण किए.



इस अवसर पर बधाई देते हुए डॉ. सी नारायण रेड्डी ने साहित्यकारों का आह्वान किया कि हिंदी के माध्यम से आंध्र प्रदेश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देशविदेश के हिंदी पाठकों के समक्ष प्रभावी रूप में प्रस्तुत करें. डॉ. यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद ने भी ध्यान दिलाया कि अकादमी का उद्देश्य केवल हिंदी को प्रोत्साहित करना भर नहीं बल्कि हिंदी के माध्यम से आंध्र प्रदेश के प्रदेय से शेष भारत और विश्व को परिचित कराना है.



सम्मान के क्रम में सबसे पहले डॉ. सी.नारायण रेड्डी ने पुष्पगुच्छ दिया.

और फिर प्रशस्तिपत्र, स्मृतिचिह्न एवं सम्मानराशि प्रदान की गई.

सम्मान ग्रहण करते हुए कवि-समीक्षक ऋषभ देव शर्मा .

भारी वर्षा के बावजूद इस आयोजन में भारी संख्या में हिंदीप्रेमी उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए.

डॉ. सी.नारायण रेड्डी ने अपनी हिंदी ग़ज़ल भी सुनाई -'बादल का दिल पिघल गया तो सावन बनाता है.'

सरकारी आयोजन था.सो, मीडिया वाले भी कतारबद्ध थे.अगले दिन हिंदी, तेलुगु और अंग्रेजी के समाचारपत्रों में तो छपा ही, चैनलों पर भी दिखाया गया.

आंध्र के हिंदीपरिवार की एकसूत्रता औ आत्मीयता पूरे आयोजन में दृष्टिगोचर हुई.

इस बहाने कुछ क्षण मिलजुलकर हँसने-मुस्कराने के भी मिले !!!

                                                                                                  NEWS COLLECTED
                                                                                                             BY
                                                                                              RADHAKRISHNA MIRIYALA....

तेलुगु कविता : अमृत धार అమృత ధార

तेलुगु कविता : अमृत धार అమృత ధార

                                                         By Smt. DR.NEERAJA GKONDA
ఎవరివో నీవు , ఎవరినో నేను

ఎకమైతిమి ఈ వసంతం లో .

ఏది ఏమైనను ......

నా చెమరిన కంఠంపై ముత్యాల హారానివి నీవు.

నా వొనికే పెదవులపై చిలిపి చిరు నవ్వువి నీవు .

నా హృది వీణను మీటి , నవ రస రాగాలను ఆలపించి

నా మదిలో శృంగార భావాలకు ప్రాణం పోసింది నీవు .

రససిక్త మాదుర్యాన్ని చవి చూపించి

నా మోడువారిన జీవితంలో

అమృత ధార వర్షింప జేసింది నీవు .


నా అణువు అణువులో గిలిగింతలు లేపి

నన్ను మైమరిపించింది నీవు

నా ప్రతి స్పందనలోను అనురాగాన్ని నింపి

ఓంకారం పలికించింది నీవు .
 
 
तेलुगु कविता : अमृत धार

                                                     श्रीमती .डा.नीरजा जी .....
ऎवरिवो नीवु , ऎवरिनो नेनु

ऎकमैतिमि ई वसंतं लो .

एदि एमैननु ......


ना चॆमरिन कंठंपै मुत्याल हारानिवि नीवु.

ना वॊनिके पॆदवुलपै चिलिपि चिरु नव्वुवि नीवु .

ना हृदि वीणनु मीटि , नव रस रागालनु आलपिंचि

ना मदिलो शृंगार भावालकु प्राणं पोसिंदि नीवु .


रससिक्त मादुर्यान्नि चवि चूपिंचि

ना मोडुवारिन जीवितंलो

अमृत धार वर्षिंप जेसिंदि नीवु .



ना अणुवु अणुवुलो गिलिगिंतलु लेपि

नन्नु मैमरिपिंचिंदि नीवु

ना प्रति स्पंदनलोनु अनुरागान्नि निंपि

ओंकारं पलिकिंचिंदि नीवु .

Sunday, March 20, 2011

पंडित माखन लाल चतुर्वेदी --पुष्प की अभिलाषा

                          पुष्प की अभिलाषा
                                     पंडित माखन लाल चतुर्वेदी


भविष्य की हिंदी व हिंदी का भविष्य

                                    भविष्य की हिंदी व हिंदी का भविष्य


आजकल भारत में ‘भविष्य की हिंदी व हिंदी का भविष्य’ को लेकर बहुत सी परिचर्चाएं, गोष्ठियों व कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।

अपनी भाषा को लेकर जो गर्व, जो उत्साह होना चाहिए उसकी हम भारतीयों में बहुत कमी है। हम हिंदी के ऩाम पर भाषणबाजी तो खूब करते हैं पर उतना श्रम और कर्म नहीं करते। हिंदी की सरकारी दावत तो खूब उड़ाई जाती है पर शिरोधार्य तो अँग्रेजी ही है।
हमारा नेता, हमारा लेखक और बुद्धिजीवी-वर्ग हिंदी की दुहाई तो बहुत देता है परन्तु अपने कुल-दीपकों को अँग्रेजी स्कूलों और विदेशों में ही शिक्षा दिलवाना चाहता है। ‘हाथी के दांत, खाने के और दिखाने के और।’

हमें अँग्रेजी बोलने, पढ़ने-लिखने और अँग्रेजियत दिखाने में अपना बड़प्पन दिखाई देता है किंतु सच तो यह है कि यह हमारी मानसिक हीनता ही है।

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने स्वदेश-प्रेम, स्वभाषा और स्व-संस्कृति की गरिमा पर जोर देते हुए कहा है-

निज भाषा उन्नति अहै; सब उन्नति को मूल।

बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।

अँग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रविन।

पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन।।

अँग्रेजी पढ़िए, जितनी और अधिक भाषाएं सीख सकें सीखें किंतु अपनी भाषा को हीन करके या बिसराने की कीमत पर कदापि नहीं।

           जय हिंदी ----- जय जय हिंदी ।। ।। ।।  
                                                         

डॉ. सुधांशु चतुर्वेदी

डॉ. सुधांशु चतुर्वेदी के साहित्य-सृजन की हीरक जयंती पर हमारा शत-शत नमन॥
         और कुछ विशेषताओं के लिए श्री सुधांशु की इस वेब में देख सकते हैं॥॥              
                             http://sudhanshuchaturvedi.com/ 

Friday, March 18, 2011

होली की खुब सारी शुभकामनाये........



रंग के त्यौहार में                                                                                                     


सभी रंगों की हो भरमार


ढेर सारी खुशियों से भरा हो आपका संसार


यही दुआ है हमारी भगवान से हर बार।

आपको और आपके परिवार को होली की खुब सारी शुभकामनाये इसी दुआ के साथ आपके व आपके परिवार के साथ सभी के लिए सुखदायक, मंगलकारी व आन्नददायक हो। आपकी सारी इच्छाएं पूर्ण हो व सपनों को साकार करें। आप जिस भी क्षेत्र में कदम बढ़ाएं, सफलता आपके कदम चूम......


                                  होली की खुब सारी शुभकामनाये........

                                                                                               आप का
                                                                                   राधा कृष्ण मिरियाला  

  हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह – एक गरिमामय एवं अविस्मरणीय आयोजन      हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी अभिव्यक्ति, हमारी सांस्कृतिक चेतना...